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named prakashkshirsagar.blogspot.com
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prakash kshirsagar
sub editor, daily gomantak, panaji goa

क्‍यों

इस बंजर जमीन पर
उगाने की कोशीश
क्‍यों करते है यह लोग ?
इस जमीन को बंजर तो इन्होनेही बनाया था
फिर भी जमीन को क्‍यों कोसते है यह लोग
खाने की दावत तो देते है यह लोग
खातेभी है खूब जमकर पर...
खाने में लगते है कंकर
कंकर तो बनाते है यह लोग?
तो .. कंकर को क्‍यों कोसते है यह लोग
धूप में चलना तो पडताही है सबको
धूप तपती है, जलाती है
छांव की चाह करते है सब
पेड तो काटते है यही
फिर छांव को क्‍यों कोसते है यह लोग ?

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प्रतीक
तपती दोपहरमें चल रही थी वह
लिये कमरपर जल का डेरा
लेकिन कहा था जल उसमे
वह तो भरा था, केवल दुखसे
जल तो लिया आँखोंका सहारा
बगलमे उसके थी बच्ची
प्रतीक असहायता का
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दोष
चुभ गया काटा अगर
तो दोष उसका कैसा?
फूल अगर
तो दोष उसका कैसा?
खिलते खिलते कली
रूठ गयी पेडपर तो
उसका दोष कैसा?

- प्रकाश रामचंद्र क्षीरसागर,
ताळगाव गोवा