मैं अपनी कहानी सुनाता हूँ
आजकल मैं अपनी कहानी सुनाता हूँ
अपने आपकोही।
किसीको समय नही है।
चाहत भी नही है।
दुसरोंका छोडो मुझे अपनेको भी
समय कहा की मै अपने
दिल की बात सुन लू।
फिरभी कभी कभी
दिल चाहता है
की मै अपनी कहानी सुन तो ले लुंगा
मनही मन मे केवल

- प्रकाश रामचंद्र क्षीरसागर,
ताळगाव, गोवा (403002)